रेढ़ाखोल बनेगा ज्ञान, भक्ति और मानवता का केंद्र, संत भीम भोई की चेतना को मिलेगी वैश्विक पहचान: धर्मेंद्र प्रधान
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रेढ़ाखोल ओडीशा
By ACGN 7647 9817119303 948009
ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज
रेढ़ाखोल। रेढ़ाखोल में आयोजित “भीम भोई लोक महोत्सव–2026” केवल लोकनृत्य, लोकगीत और लोककला का उत्सव नहीं है, बल्कि यह ओड़िया अस्मिता, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक पहचान का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। यह महोत्सव संत कवि भीम भोई की महान मानवतावादी, समतामूलक और करुणा आधारित विचारधारा को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

यह बात केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने “रेढ़ाखोल भीम भोई लोक महोत्सव–2026” के अवसर पर अपने वीडियो संदेश के माध्यम से कही। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल भीम मंडली के गौरवशाली इतिहास को दुनिया के सामने लाएगा, बल्कि रेढ़ाखोल को एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर बनेगा।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि रेढ़ाखोल की भूमि ज्ञान, भक्ति और संस्कारों की भूमि रही है। यहां की परंपरा, इतिहास और आध्यात्मिक विरासत अत्यंत समृद्ध और गौरवपूर्ण है। यह क्षेत्र सदियों से मानवता, करुणा और समानता के संदेश को आगे बढ़ाता आया है।
उन्होंने बताया कि रेढ़ाखोल क्षेत्र स्थित भीम मंडली में दस हजार वर्ष से भी अधिक पुरानी मानव सभ्यता के जीवन चित्र अंकित हैं, जो इस भूमि की प्राचीनता और सांस्कृतिक गहराई को दर्शाते हैं। यह धरती “दो भीमों” की कर्मभूमि रही है।
एक ओर महाभारत के महावीर भीमसेन, जो शौर्य, साहस और न्याय के प्रतीक हैं, और दूसरी ओर महान समाज सुधारक संत कवि भीम भोई, जिन्होंने महिमा धर्म के माध्यम से वंचितों, बनवासियों और जनजातीय समाज में आत्मसम्मान और मानव गरिमा की चेतना जगाई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दोनों महान विभूतियों ने अपने जीवन में अनेक कष्ट सहे, संघर्ष किए, लेकिन उनका लक्ष्य एक ही था—लोककल्याण और समाज में न्याय की स्थापना। ऐसे पवित्र और ऐतिहासिक स्थल पर पहली बार जिला प्रशासन की ओर से “रेढ़ाखोल भीम भोई लोक महोत्सव–2026” का आयोजन होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और सम्मान की बात है।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी बताया कि हाल ही में सुशासन दिवस के अवसर पर रेढ़ाखोल क्षेत्र में 245 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया है। इन परियोजनाओं से क्षेत्र के आधारभूत ढांचे, शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में रेढ़ाखोल न केवल ओड़िशा, बल्कि पूरे देश में एक आध्यात्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक चेतना और शिक्षा के केंद्र के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा और संत भीम भोई का मानवतावादी संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचेगा।
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