आस्था, इतिहास और प्रकृति का संगम है सेतगंगा धाम
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मुंगेली, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
रामजानकी मंदिर, देवी महामाया सिद्धेश्वरी और टेसुवा नदी के तट पर बसी धर्मनगरी सेतगंगा श्रद्धालुओं को करती है आकर्षित
मुंगेली ACGN :- छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध प्राकृतिक छटा, पर्वत श्रृंखलाओं, नदियों, झरनों और धार्मिक स्थलों के कारण देशभर में विशिष्ट पहचान बना रहा है। बस्तर से लेकर मैकल पर्वत श्रृंखला तक फैले इस राज्य में अनेक ऐसे पर्यटन और धार्मिक स्थल हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों का मन सहज ही मोह लेते हैं। इन्हीं स्थलों में मुंगेली जिले का सेतगंगा धाम भी विशेष महत्व रखता है, जो अपनी धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।
मुंगेली जिले में जिला मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर की दूरी पर मुंगेली–पंडरिया–जबलपुर राष्ट्रीय मार्ग पर टेसुवा नदी के तट पर स्थित श्री रामजानकी मंदिर सेतगंगा धाम श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित प्राचीन रामजानकी मंदिर, महामाया सिद्धेश्वरी देवी का मंदिर और आसपास का रमणीय प्राकृतिक वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर यहां पांच दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
छत्तीसगढ़ में शिरपुर के शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन सहअस्तित्व के पुरातात्विक प्रमाण, सरगुजा का रामगढ़ और सीताबेंगरा गुफा, बस्तर के चित्रकूट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कवर्धा जिले का भोरमदेव मंदिर, मैकल पर्वत श्रृंखला, कुटुम्बसर और मदकूद्वीप, शिवरीनारायण और राजिम जैसे तीर्थस्थल राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाते हैं। इसी श्रृंखला में सेतगंगा धाम भी अपनी अलग पहचान रखता है।
लोककथाओं के अनुसार पंडरिया के तत्कालीन राजा दलसाय सिंह अत्यंत धार्मिक, प्रतापी और दयालु स्वभाव के थे। वे प्रत्येक पर्व पर अमरकंटक स्थित मां नर्मदा कुंड में स्नान के लिए जाया करते थे। वृद्धावस्था में असमर्थ होने पर वे व्याकुल रहने लगे। मान्यता है कि एक रात्रि उन्हें स्वप्नादेश प्राप्त हुआ, जिसमें मां नर्मदा ने उनके ही राज्य की पूर्व दिशा में प्रकट होने और वहां कुंड एवं मंदिर स्थापना का निर्देश दिया। स्वप्नादेश के अनुसार राजा ने पूर्व दिशा में खोज कर सेतगंगा क्षेत्र में एक बुलबुला नुमा उद्गम स्थल देखा और वहीं मंदिर तथा कुंड की स्थापना कराई। कालांतर में यहां एक छोटी बस्ती बस गई, जिसे पहले श्वेतगंगा और बाद में सेतगंगा के नाम से जाना गया।
आज सेतगंगा धाम न केवल मुंगेली जिले बल्कि अन्य जिलों और प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है। यहां विभिन्न पर्वों और धार्मिक आयोजनों पर बड़ी संख्या में भक्तजन पूजा-अर्चना और मन्नतें मांगने पहुंचते हैं। वर्ष 2010-11 में सेतगंगा को पर्यटन स्थल की श्रेणी में शामिल किया गया, जिससे इसके विकास को नई दिशा मिली।
वर्ष 2026 में माघी पूर्णिमा का पांच दिवसीय मेला 1 फरवरी से धर्मनगरी सेतगंगा धाम में आयोजित किया जाएगा, जिसमें धार्मिक अनुष्ठानों, मेले और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। महंत राधेश्याम दास और नारायण शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित यह मेला क्षेत्र की धार्मिक पहचान को और सुदृढ़ करेगा।

प्रदीप मिश्रा
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