छत्तीसगढ़ सशक्त दिव्यांगजन संघ ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, 12 फरवरी को सीटू के बैनर तले होने वाली राष्ट्रीय हड़ताल को संघ का समर्थन
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
दिव्यांग अधिकारों की अनदेखी और श्रम कानूनों में बदलाव के विरोध में CITU की हड़ताल को बताया सामाजिक न्याय की लड़ाई
कोरबा ACGN :- दिव्यांगों और मेहनतकश मजदूरों से जुड़े अधिकारों में लगातार हो रही कटौती और उपेक्षा के खिलाफ छत्तीसगढ़ सशक्त दिव्यांगजन संघ ने कड़ा रुख अपनाया है।

संघ ने राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन मंच द्वारा 12 फरवरी को प्रस्तावित CITU की राष्ट्रीय हड़ताल को पूर्ण समर्थन देने का ऐलान करते हुए कहा है कि यह संघर्ष केवल मजदूरों तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांग, वंचित और कमजोर तबके के अस्तित्व से भी सीधे जुड़ा हुआ है।

संघ ने कहा कि एक ओर संविधान और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 का उल्लेख किया जाता है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर दिव्यांगों को पेंशन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सहायक सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। इसी तरह श्रमिकों के लिए नौकरी की सुरक्षा खत्म कर ‘हायर एंड फायर’ को आसान बनाया जा रहा है, हड़ताल के अधिकार को कमजोर किया जा रहा है और 8 घंटे काम जैसे स्थापित श्रम अधिकारों पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
संघ का कहना है कि न्यूनतम वेतन पर हो रहे हमले, यूनियनों को कमजोर करने की प्रक्रिया और श्रम कानूनों में किए गए बदलावों का सबसे ज्यादा असर दिव्यांग कर्मचारियों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों पर पड़ रहा है। ऐसे में CITU द्वारा उठाई जा रही मांगें सामाजिक न्याय और समान अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण हैं, जिनका समर्थन जरूरी है।

छत्तीसगढ़ सशक्त दिव्यांगजन संघ ने 28/01/2026 को ज्ञापन के माध्यम से सरकार के समक्ष दिव्यांग समाज से जुड़ी प्रमुख मांगें भी रखी हैं, जिनमें दिव्यांगजनों को ₹5000 प्रतिमाह सम्मानजनक पेंशन, सरकारी और निजी क्षेत्र में दिव्यांग आरक्षण का सख्ती से पालन, दिव्यांग युवाओं के लिए रोजगार व कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था, व्हीलचेयर, ट्राई-साइकिल, श्रवण यंत्र सहित आवश्यक सहायक उपकरणों की निःशुल्क उपलब्धता, लंबित पेंशन और सहायता राशि का तत्काल भुगतान तथा दिव्यांग कल्याण से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन शामिल है।
संघ ने कहा कि दिव्यांग और मजदूर समाज की समस्याएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और जब श्रमिक वर्ग कमजोर होता है, तो उसका सीधा असर दिव्यांग और वंचित समुदाय पर पड़ता है। इसी कारण 12 फरवरी की राष्ट्रीय हड़ताल को सामाजिक सरोकार से जुड़ा आंदोलन मानते हुए उसका समर्थन किया जा रहा है। संघ ने सरकार से मांग की है कि श्रम और दिव्यांग विरोधी नीतियों पर पुनर्विचार करते हुए ठोस और संवेदनशील निर्णय लिए जाएं।
प्रदीप मिश्रा
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