नशे के खिलाफ आदेश पर सियासत गरमाई, भूपेश बघेल का सरकार पर तीखा हमला
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रायपुर छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
रायपुर : राजधानी रायपुर में नशीले पदार्थों के बढ़ते सेवन को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा जारी किए गए एक आदेश ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। रायपुर पुलिस कमिश्नर द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत जारी इस आदेश की प्रति सोशल मीडिया पर साझा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या है रायपुर पुलिस कमिश्नर का आदेश

जारी आदेश में यह स्वीकार किया गया है कि रायपुर शहर में नाबालिगों और युवाओं द्वारा गांजा, चरस सहित अन्य नशीले पदार्थों का सेवन बढ़ रहा है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि नशे के लिए उपयोग में लाई जाने वाली सामग्री जैसे रोलिंग पेपर, गोगो स्मोकिंग कोन, परफेक्ट रोल आदि की बिक्री पान दुकानों, किराना दुकानों, चाय दुकानों, कैफे और रेस्टोरेंट जैसे सार्वजनिक स्थानों पर आसानी से उपलब्ध है।
इसी को आधार बनाते हुए पुलिस कमिश्नर ने इन सामग्रियों की बिक्री पर अस्थायी रूप से रोक लगाने का आदेश जारी किया है। यह आदेश 29 मार्च 2026 तक प्रभावशील रहेगा, यदि इसे बीच में वापस नहीं लिया गया तो। आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है।
भूपेश बघेल का वायरल सोशल मीडिया पोस्ट

इस आदेश की प्रति साझा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा—
“रायपुर पुलिस कमिश्नर का यह आदेश अक्षरशः पढ़िए।
इससे स्पष्ट हो गया है कि अब सरकार भी मान रही है कि रायपुर में गांजा/चरस का सेवन बड़ी मात्रा में हो रहा है।
सवाल यह है कि गांजा/चरस की उपलब्धता कैसे रुके, इसके लिए सरकार क्या कर रही है?
इस आदेश के अनुसार नशे के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली सामग्री की बिक्री पर रोक लगाई जाएगी, लेकिन मूल कारण के लिए आप क्या कर रहे हैं?
यह तो ठीक वैसा ही है जैसे शराब का सेवन रोकने के लिए डिस्पोजल ग्लास या चखना बेचने पर रोक लगा दी जाए।
यह आदेश स्थायी क्यों नहीं है? सिर्फ़ दो महीने के लिए ही क्यों लागू किया गया है?
आदेश में लिखा है ‘यदि बीच में वापस ना लिया गया’ — कौन है जो इसे बीच में रोक सकता है?
नशा सिर्फ़ रायपुर में नहीं, पूरा छत्तीसगढ़ इसकी गिरफ्त में है। यदि सरकार गंभीर है तो गंभीर आदेश निकालिए, मीडियाबाज़ी के लिए सरकार के पास बहुत इवेंट हैं।”
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
भूपेश बघेल के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे सरकार की नाकामी बता रहे हैं, वहीं विपक्षी इसे प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बता रहे हैं।
हालांकि अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं
हालांकि इस पूरे मामले में राज्य सरकार या गृह विभाग की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह विषय न केवल प्रशासनिक बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी विचारणीय और सोचनीय बन गया है कि नशे जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकार की रणनीति कितनी प्रभावी और दीर्घकालिक है।
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