पर्यटन बना छत्तीसगढ़ का आर्थिक इंजन, संस्कृति और पुरातत्व ने दी राज्य को नई पहचान
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रायपुर छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
रायपुर, 28 जनवरी 2026 – छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक एवं संस्कृति एवं पुरातत्व के संचालक श्री विवेक आचार्य ने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर आर्थिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और विरासत संवर्धन में समन्वित प्रगति का मॉडल स्थापित किया है जो प्रदेश की तस्वीर को पूरी तरह बदलने में सहायक रहा है

पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने से निजी निवेश के नए द्वार खुले और राज्य व देश के प्रमुख शहरों में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से 500 करोड़ रुपए से अधिक का निजी निवेश सुनिश्चित किया गया जिससे पर्यटन अधोसंरचना, होटल, रिसॉर्ट और साहसिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिला। रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत आईआरसीटीसी के साथ हुए समझौते के तहत वर्ष 2024-25 में लगभग 42,500 श्रद्धालुओं को विशेष ट्रेनों से अयोध्या दर्शन कराकर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला। राज्य में ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए नई होम-स्टे नीति लागू की गई और 500 नए होम-स्टे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया। इस नीति के तहत पूंजी निवेश सब्सिडी और ब्याज सब्सिडी का बजट भी स्वीकृत किया गया ताकि ग्रामीण और समुदाय आधारित पर्यटन को मजबूती मिले
भारत सरकार की SASCI योजना के तहत चित्रोत्पला फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर के विकास की मंजूरी मिली है जिसकी कुल अनुमानित लागत 350 करोड़ रूपए है। भूमि पूजन 24 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के करकमलों से हुआ। यह परियोजना छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के साथ ही स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-आंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराएगी और निवेश के नए अवसर सृजित करेगी। परियोजना से राज्य की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी
केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव मंदिर कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है जो लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर बनाया जा रहा है। भूमि पूजन 1 जनवरी 2026 को पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र शेखावत और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने किया। यह परियोजना भोरमदेव मंदिर की लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित रखने और राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है
राज्य में मयाली-बगीचा सर्किट के विकास के लिए जशपुर में 10 करोड़ रूपए की परियोजना और सिरपुर को एकीकृत विकास के माध्यम से विश्व विरासत स्थल के रूप में बदलने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। साथ ही चित्रकोट इंडिजिनस नेचर रिट्रीट के माध्यम से चित्रकोट को वैश्विक स्तर पर पुनर्विकसित करने का प्रस्ताव पर्यटन मंत्रालय को प्रस्तुत किया गया है और इसके लिए 250 करोड़ रुपए की फंडिंग अपेक्षित है
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने स्पेन, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में आयोजित वैश्विक यात्रा कार्यक्रमों में भाग लेकर राज्य का प्रचार किया और फिक्की व यूनिवर्सल ट्रैवल कॉन्क्लेव जैसी संस्थाओं के साथ भागीदारी से पर्यटन स्थलों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ी। पर्यटन व्यवसायों में भी वृद्धि हुई है जनवरी 2024 में केवल 30 टूर और ट्रैवल ऑपरेटर थे, अब उनकी संख्या 300 से अधिक हो गई है। इसके अलावा 15 होटल छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के साथ पंजीकृत हैं और रिसॉर्ट व मोटल की परिचालन दक्षता और रणनीतिक प्रबंधन के कारण मंडल के वित्तीय लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जो वित्त वर्ष 2024-25 में 2 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 10 करोड़ रुपए हो गया
छत्तीसगढ़ की पर्यटन नीति 2026 के तहत अगले पांच वर्षों में 350 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आने की संभावना है और 17 पर्यटन संपत्तियों को निजी भागीदारी से विकसित कर लगभग 200 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित करने की योजना है जिससे सैकड़ों स्थानीय व्यक्तियों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। राज्यभर में 500 नए होम-स्टे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है और चित्रकोट में टेंट सिटी के विकास के माध्यम से कम से कम 50 लक्जरी टेंट लगाए जाएंगे। इसके साथ ही फिक्की के सहयोग से वार्षिक छत्तीसगढ़ ट्रैवल मार्ट आयोजित किया जाएगा जो बीटूबी पर्यटन को बढ़ावा देगा और 200 से अधिक टूर ऑपरेटरों को आकर्षित करेगा
संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की उपलब्धियों में कलाकारों और साहित्यकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीकरण शामिल है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 141 कलाकारों को 34 लाख रुपये और वित्तीय वर्ष 2025-26 में 130 कलाकारों को 31 लाख रुपये पेंशन के रूप में प्रदान किए गए। कलाकार कल्याण कोष योजना के तहत बीमारियों, दुर्घटना और मृत्यु की स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान की गई। बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी से 9 फरवरी तक किया गया जिसमें जनजातीय नृत्य, लोकगीत, वेश-भूषा, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजन प्रदर्शित किए जाएंगे
पुरातत्व क्षेत्र में रायपुर से 25 किलोमीटर पूर्व ग्राम रीवां (रीवांगढ़) में उत्खनन किया गया और वैज्ञानिक कार्बन-14 डेटिंग से यह प्रमाणित हुआ कि इस क्षेत्र में मानव सभ्यता उत्तर वैदिक काल 800 ईसा पूर्व से भी पहले विकसित हो चुकी थी। राज्य में भारत भवन, राज्य अभिलेखागार, राजकीय मानव संग्रहालय और स्वामी विवेकानंद स्मारक संग्रहालय की स्थापना की योजना भी है जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने तथा पर्यटन और शिक्षा को एक नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी
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