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संतों का अपमान अब नहीं सहेगा सनातन- महंत त्यागी जी महाराज

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राजनांदगांव छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

उत्तर प्रदेश में साधु-संतों के साथ हुए व्यवहार पर मुरमुंदा आश्रम के महंत त्यागी जी महाराज की कड़ी प्रतिक्रिया, शासन-प्रशासन को दी चेतावनी

राजनांदगांव: राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ के समीप स्थित मुरमुंदा आश्रम के महंत एवं गोरखनाथ युवा वाहिनी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री त्यागी जी महाराज ने उत्तर प्रदेश में साधु-संतों के साथ हुए व्यवहार पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
त्यागी जी महाराज ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जिस प्रकार प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान संतों की शिखा पकड़कर उन्हें घसीटा गया और धक्का-मुक्की की गई, वह न केवल निंदनीय है बल्कि पूरे सनातन समाज को आहत करने वाला कृत्य है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन अपने कर्तव्य निभाए, लेकिन धर्म के प्रतीकों और संतों के सम्मान को कुचलना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी स्वयं को हिंदूवादी संगठन के रूप में प्रस्तुत करती है। केंद्र और राज्य दोनों जगह उनकी सरकारें हैं, इसके बावजूद यदि साधु-संतों का इस प्रकार सार्वजनिक अपमान होता है, तो यह गंभीर प्रश्न खड़े करता है। त्यागी जी महाराज ने कहा कि सत्ता में बैठी सरकार यदि अपने ही वैचारिक आधार स्तंभ माने जाने वाले संत समाज की रक्षा नहीं कर सकती, तो यह शासन की दिशा और नीयत पर सवाल है।
त्यागी जी महाराज ने कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन राजनीति के लिए संतों और धर्म को अपमानित करना सबसे बड़ा अपराध है। संत समाज सत्ता का विरोधी नहीं है, लेकिन वह अन्याय का मौन दर्शक भी नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ राजनीति कीजिए, जनहित में फैसले लीजिए, लेकिन सनातन धर्म और संत परंपरा को कुचलने की कोशिश मत कीजिए।
उन्होंने वर्तमान समय में शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ सामने आई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल किसी एक संत या मठ का अपमान नहीं है, बल्कि पूरे सनातन विचारधारा पर प्रहार है। शंकराचार्य जैसे महान आध्यात्मिक पद पर आसीन संतों और उनके अनुयायियों के साथ यदि प्रशासनिक दमन होता है, तो यह लोकतंत्र और धार्मिक स्वतंत्रता दोनों के लिए खतरे की घंटी है।
त्यागी जी महाराज ने कहा कि संत समाज हमेशा राष्ट्र और समाज के साथ खड़ा रहा है। आपदाओं में संत आगे आए, समाज को जोड़ने का कार्य संतों ने किया, और आज वही संत अगर अपमानित किए जा रहे हैं, तो यह पूरे हिंदू समाज के आत्मसम्मान का प्रश्न बन जाता है।
उन्होंने सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि सनातन धर्म अब अपने संतों का अपमान चुपचाप सहने वाला नहीं है। यह समय है कि शासन-प्रशासन आत्ममंथन करे और समझे कि संत समाज को दबाने से नहीं, सम्मान देने से ही सामाजिक संतुलन बना रह सकता है। यदि इस तरह की घटनाएं दोहराई गईं, तो संत समाज को मजबूर होकर सड़क से सदन तक आवाज उठानी पड़ेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
त्यागी जी महाराज ने अंत में कहा कि हिंदू सनातन धर्म किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि करोड़ों आस्थावान लोगों की चेतना है। इस चेतना को ठेस पहुंचाने का परिणाम आने वाले समय में गंभीर हो सकता है।
उन्होंने सभी सनातनियों और संत समाज से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि आपसी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में यदि धर्म या धर्म के प्रतीक संतों का अपमान किया गया, तो अब इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं एक संत हैं और उनके नेतृत्व में संत समाज को सम्मान मिलने की अपेक्षा रहती है। ऐसे में यह प्रतीत होता है कि संतों के साथ हुआ यह व्यवहार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रत्यक्ष आदेश का परिणाम नहीं है, बल्कि उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने की मंशा से किसी स्तर पर प्रशासन पर दबाव बनाकर यह सब करवाया गया है।
त्यागी जी महाराज ने कहा कि संत समाज इन घटनाओं को गंभीरता से देख रहा है और यदि भविष्य में संतों और सनातन परंपरा के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया गया, तो इसका जवाब संगठित, शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ तरीके से दिया जाएगा।

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