महिलाओं की आत्मनिर्भरता और छत्तीसगढ़ी संस्कृति का संगम बना “व्यंजनों की बगिया”
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कोरबा | छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
कोरबा:- माँई G फाउंडेशन के आयोजन में लोकस्वाद, लोकखेल और लोकनृत्य ने बांधा समां, बड़ी संख्या में नागरिक हुए शामिल
महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर सक्रिय माँई G फाउंडेशन सोसायटी द्वारा छत्तीसगढ़ी व्यंजनों, लोकसंस्कृति और पारंपरिक विरासत के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष आयोजन “व्यंजनों की बगिया” का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन 18 जनवरी 2026, रविवार को घंटाघर स्थित ओपन थिएटर में प्रातः 10 बजे से प्रारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में शहरवासियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

इस गरिमामय आयोजन में उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी, महापौर संजू देवी राजपूत, जिला महामंत्री नरेन्द्र देवांगन, हरिभूमि के जिला ब्यूरो प्रमुख राकेश श्रीवास्तव, नवभारत के जिला ब्यूरो प्रमुख नौशाद खान, माँई G फाउंडेशन की अध्यक्ष निधि तिवारी, सचिव हेमलता शर्मा एवं श्रद्धा बुंदेला की विशेष उपस्थिति रही। अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए महिलाओं के आत्मनिर्भर प्रयासों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों के आकर्षक स्टॉल लगाए गए, जिनमें चीला, फरा, अइरसा, पीडिया, पपची, देहरौरी, बड़ी, बिजौरी, दही-मिर्ची सहित अनेक पारंपरिक स्वादों ने लोगों को खूब आकर्षित किया। यह व्यंजन मेला न केवल स्वाद का उत्सव बना, बल्कि स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त मंच भी सिद्ध हुआ।
सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित पारंपरिक एवं मनोरंजक प्रतियोगिताओं ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। फुगड़ी, खो-खो, कुर्सी दौड़, पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी वेशभूषा प्रतियोगिता और छत्तीसगढ़ी व्यंजन थाली सजाओ प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। महिलाओं और युवतियों में प्रतियोगिताओं को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
शाम 4 बजे से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को समर्पित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। प्रसिद्ध लोक कलाकार पूजा दीवान द्वारा प्रस्तुत पंडवानी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही स्थानीय कलाकारों ने सुआ, गेड़ी, करमा, ददरिया और छेरछेरा जैसे छत्तीसगढ़ी लोकगीत एवं नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियाँ देकर पूरे वातावरण को लोकमय बना दिया।
“व्यंजनों की बगिया” आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं। यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ी संस्कृति का जीवंत उत्सव बना, बल्कि समाज में महिलाओं की सशक्त भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल साबित हुआ।
प्रदीप मिश्रा
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