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संविदा आयुर्वेद चिकित्सक की सेवा वृद्धि रोकी, मानवाधिकार और कानून उल्लंघन के आरोप

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रायगढ़ | छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

‘बहुत अच्छा’ कार्यमूल्यांकन के बावजूद सेवा से बाहर, डॉ. खुर्शीद खान की गुहार पीएम से राज्यपाल कार्यालय तक, न्याय न मिलने पर परिवार सहित आत्महत्या की अनुमति की मांग


रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बायसी में वर्षों तक सेवाएं देने वाले संविदा आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. खुर्शीद खान की सेवा वृद्धि रोके जाने का मामला अब केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि कानून उल्लंघन और मानवाधिकार से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। न्याय की आस में डॉ. खान ने प्रधानमंत्री कार्यालय, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखते हुए सेवा बहाली की मांग की है। पत्र में उन्होंने न्याय न मिलने की स्थिति में परिवार सहित आत्महत्या की अनुमति तक की मांग की है।

डॉ. खुर्शीद खान वर्ष 2003 से जून 2021 तक लगातार संविदा आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे। सत्र 2021-22 में रायगढ़ जिले के 35 संविदा चिकित्सकों में से 32 की सेवा वृद्धि कर दी गई, जबकि केवल तीन चिकित्सकों को बाहर रखा गया। बाद में इनमें से दो चिकित्सकों की सेवा बहाल कर दी गई, लेकिन डॉ. खान को उनके कार्यमूल्यांकन “बहुत अच्छा” होने के बावजूद सेवा से वंचित रखा गया, जिससे चयनात्मक कार्रवाई के आरोप लग रहे हैं।


डॉ. खान का कहना है कि उनके नियंत्रण अधिकारी खंड चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विजयनगर द्वारा वर्ष 2020-21 का कार्यमूल्यांकन “बहुत अच्छा” टिप्पणी के साथ जिला आयुर्वेद अधिकारी रायगढ़ को भेजा गया था, जिसकी विभागीय प्राप्ति फरवरी 2021 में हो चुकी थी। इसके बावजूद कथित रूप से दुर्भावनावश उनके मूल्यांकन को “सिर्फ अच्छा” बताकर कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिससे उनकी सेवा वृद्धि रोकी जा सके।


आवेदन में यह भी उल्लेख है कि डॉ. खान ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बायसी के प्रभारी के साथ-साथ 10 उप स्वास्थ्य केंद्रों, मुख्यमंत्री हाट बाजार, कोविड-19 ब्लॉक स्तरीय रेपिड रिस्पांस टीम, वैक्सीनेशन, कांटेक्ट ट्रेसिंग और सैंपल कलेक्शन जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। वर्ष 2015 में कायाकल्प योजना के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बायसी को पूरे छत्तीसगढ़ में द्वितीय स्थान से सम्मानित किया जाना भी उनके कार्य की गुणवत्ता को दर्शाता है।
डॉ. खान का आरोप है कि उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों और आपराधिक प्रकरणों की जांच में सभी आरोप निराधार पाए गए और प्रकरण खारिज कर दिया गया। इसके बावजूद केवल शिकायत या एफआईआर के आधार पर सेवा वृद्धि रोकी गई, जो सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के उन आदेशों के विपरीत है, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि मात्र एफआईआर के आधार पर किसी व्यक्ति को नियुक्ति या सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता। इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
मामले का मानवीय पक्ष और भी चिंताजनक है। डॉ. खान के दो बच्चे यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे, जो सेवा वृद्धि न होने के कारण बाधित हो गई। बैंक लोन, आय का कोई अन्य साधन नहीं और उम्र की सीमा के चलते पुनः शासकीय सेवा का अवसर न मिल पाने से पूरा परिवार गहरे आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल सचिवालय ने 4 दिसंबर 2025 को स्वास्थ्य विभाग और पुलिस अधीक्षक रायगढ़ को पत्र भेजकर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन स्वास्थ्य विभाग में कथित मनमानी और चयनात्मक सेवा वृद्धि पर जवाबदेही तय करेगा, या फिर एक संविदा चिकित्सक की लड़ाई फाइलों में ही दबकर रह जाएगी।

प्रदीप मिश्रा
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