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रायपुर DEO दफ्तर में आग: हादसा या दस्तावेज़ों का अंत?

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रायपुर छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

रायपुर में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के दफ्तर में लगी भीषण आग क्या सिर्फ एक दुर्घटना थी या फिर यह कई सवालों को राख में बदल देने की कोशिश है? शनिवार को DEO कार्यालय के रिकॉर्ड रूम में अचानक लगी आग ने न केवल प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया, बल्कि शिक्षा विभाग की पारदर्शिता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया।

आखिर ऐसा क्या था उन दस्तावेज़ों में, जो आग की चपेट में सबसे पहले आए? क्या यह महज संयोग है कि जिन फाइलों में अनुकंपा नियुक्ति, बजट आवंटन, निजी स्कूलों की मान्यता, मध्यान्ह भोजन योजना और स्कूलों से जुड़ी शिकायतें दर्ज थीं, वही सब जलकर राख हो गईं?
आग की लपटें इतनी भीषण थीं कि एक किलोमीटर दूर तक दिखाई दीं, लेकिन क्या इससे भी ज्यादा गंभीर वह धुआँ नहीं है, जो अब सवालों के रूप में उठ रहा है? शॉर्ट सर्किट को आग का कारण बताया जा रहा है, लेकिन क्या इतनी अहम फाइलों के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम नहीं होने चाहिए थे?
भंडार कक्ष में रखे पुराने और संवेदनशील दस्तावेज आखिर एक ही जगह क्यों जमा थे? क्या यह वही रिकॉर्ड रूम था, जहाँ वर्षों से विभागीय जांच, शिकायतें और प्रशासनिक कार्यवाहियों से जुड़ी फाइलें रखी जाती थीं? और अगर हाँ, तो उनकी डिजिटल कॉपी क्यों नहीं थी?
इस अग्निकांड में सबसे बड़ा नुकसान किसका हुआ—शिक्षा विभाग का या जवाबदेही का? जिन मामलों की जांच इन दस्तावेज़ों के आधार पर चल रही थी, अब उनका क्या होगा? जिन शिकायतों पर कार्रवाई होनी थी, उनका भविष्य कौन तय करेगा?
फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ समय पर पहुँचीं और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन क्या तब तक बहुत देर नहीं हो चुकी थी? क्या आग बुझ गई या सबूतों की राख ठंडी हो गई?
गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई और समय रहते कर्मचारियों को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन क्या फाइलों की मौत को भी सिर्फ “गनीमत” कहकर टाल दिया जाएगा?
अब सवाल यह है कि जब दस्तावेज़ ही नहीं बचे, तो जांच किस आधार पर होगी? क्या जिम्मेदारी तय होगी या यह मामला भी फाइलों के साथ राख में दफन हो जाएगा? क्या यह आग सिर्फ कागज़ों तक सीमित थी या इससे व्यवस्था की कमजोरी भी उजागर हो गई?
अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जाएगी, लेकिन क्या बिना रिकॉर्ड के जांच संभव है? क्या यह जांच भी उन्हीं फाइलों की तरह किसी स्टोर रूम में बंद होकर रह जाएगी?
आज रायपुर के DEO दफ्तर में सिर्फ आग नहीं लगी, बल्कि सवालों की पूरी श्रृंखला जलते-जलते सामने आ खड़ी हुई है—अब देखना यह है कि इन सवालों के जवाब मिलेंगे या वे भी धुएँ के साथ हवा में घुल जाएँगे।

प्रदीप मिश्रा
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