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डीएमएफ फंड दुरुपयोग मामले में केंद्र सख्त, मुख्य सचिव को स्मरण पत्र

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कोरबा | छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

ननकी राम कंवर की शिकायत पर दर्री–परसाभाटा सड़क निर्माण की जांच के निर्देश

कोरबा: पूर्व गृहमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकी राम कंवर की शिकायत पर केंद्र सरकार ने दर्री ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक परसाभाटा (बालको) तक प्रस्तावित सड़क निर्माण में डीएमएफ फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर संज्ञान लिया है। भारत सरकार के खान मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को स्मरण पत्र जारी करते हुए पूरे मामले में नाराजगी जताई है और नियमानुसार कार्रवाई करते हुए जवाब तलब किया है।
ननकी राम कंवर ने आरोप लगाया है कि यह सड़क बालको कंपनी की निजी सड़क है, जिसकी देखरेख, मरम्मत एवं निर्माण की जिम्मेदारी स्वयं बालको प्रबंधन की है। इसके बावजूद तत्कालीन कलेक्टर कोरबा अजित वसंत द्वारा बालको को निजी लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से लगभग 26 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर दी गई, जो सीधे तौर पर नियमों के विरुद्ध है। उनका कहना है कि यह कार्य बालको कंपनी के सीएसआर फंड से कराया जाना चाहिए था, न कि खनिज न्यास की राशि से।
पूर्व गृहमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि इस सड़क को लेकर भारत सरकार पहले ही 18 अगस्त 2025 एवं 24 नवंबर 2025 को मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को पत्र जारी कर चुकी है। इसके बावजूद, जांच पूरी होने से पहले ही तत्कालीन कलेक्टर कोरबा ने अपने स्थानांतरण से ठीक पहले लोक निर्माण विभाग के माध्यम से आनन-फानन में टेंडर प्रक्रिया जारी करा दी।
जारी टेंडर के अनुसार PWD कोरबा द्वारा “ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक तक 2-लेन सीसी रोड निर्माण” कार्य स्वीकृत किया गया है, जिसकी लंबाई 2.84 किलोमीटर और लागत 25.98 करोड़ रुपये बताई गई है। टेंडर आईडी 178632 के तहत 4 नवंबर 2025 को बोली प्रारंभ हुई और 25 नवंबर 2025 को समाप्त हुई।
ननकी राम कंवर ने इस पूरे मामले की शिकायत 2 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय कोयला व खान मंत्री को लिखित रूप में दी थी। उन्होंने अपने पत्रों में स्पष्ट किया है कि डीएमएफ राशि का यह उपयोग एमएमडीआर एक्ट एवं पीएमकेकेकेवाई (PMKKKY) गाइडलाइंस का उल्लंघन है और इसमें भ्रष्टाचार की मंशा स्पष्ट झलकती है।


केंद्र सरकार के खान मंत्रालय के अवर सचिव द्वारा 13 जनवरी 2026 को पुनः मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर निर्देश दिया गया है कि एमएमडीआर एक्ट एवं पीएमकेकेकेवाई के प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा की गई कार्रवाई की जानकारी प्रार्थी एवं मंत्रालय दोनों को शीघ्र उपलब्ध कराई जाए।
अब इस मामले में निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करती है या फिर जारी पत्रों की अनदेखी करती है। मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।

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