कोरबा जिले के एक और किसान ने किया जहर सेवन, 24 घंटे में दूसरा मामला
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कोरबा छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
कोरबा। धान खरीदी व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था किसानों के लिए जानलेवा साबित होती जा रही है। हरदीबाजार क्षेत्र में बीते 24 घंटे के भीतर जहर सेवन की दूसरी घटना सामने आने से न सिर्फ प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट हो गया है कि अब तक की गई कार्रवाई जमीनी स्तर पर प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है।
धान खरीदी में व्यवधान के चलते हरदीबाजार अंतर्गत ग्राम कोरबी निवासी किसान सुमेर सिंह गोंड द्वारा जहर सेवन की घटना अभी लोगों के जहन से उतरी भी नहीं थी कि एक और किसान ने इसी तरह का आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश कर दी। सुमेर सिंह गोंड के मामले में समय रहते इलाज मिलने से उसकी जान बचा ली गई थी, जिसके बाद कलेक्टर द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए हल्का पटवारी कामिनी कारे को निलंबित किया गया था तथा तहसीलदार और फड़ प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
अब दूसरा मामला, वही कारण—रकबा कटौती और धान बिक्री में बाधा
ताजा मामला कोरबा जिले के कटघोरा विकासखंड अंतर्गत उतरदा सहकारी समिति से जुड़े ग्राम झांझ का है, जहां झांझ निवासी बैसाखूराम ने तहसील परिसर में ही कीटनाशक का सेवन कर लिया। बताया जा रहा है कि किसान की कुल लगभग 3 एकड़ भूमि थी, लेकिन रिकॉर्ड में ढाई एकड़ रकबा शून्य (जीरो) दर्शा दिया गया है, जबकि शेष 50 डिसमिल भूमि में मात्र 11 क्विंटल धान का विक्रय होना बताया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि बैसाखूराम ने ट्रैक्टर लोन पर लिया हुआ है, सेवा सहकारी समिति से कर्ज भी लिया है, और जब रकबा कटौती के कारण धान बिक्री ही नहीं हो पा रही थी, तो कर्ज चुकाने की चिंता ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया। इन्हीं हालातों से परेशान होकर उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
तहसील परिसर में मचा हड़कंप, पुलिस तक पहुंची सूचना
प्राप्त जानकारी के अनुसार किसान तहसील परिसर में अपनी समस्या बता रहा था, तभी अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। जब यह स्पष्ट हुआ कि उसने कीटनाशक का सेवन किया है, तो पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।
इसी दौरान जनपद उपाध्यक्ष मुकेश जायसवाल वहां से गुजर रहे थे, जिन्होंने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए बिना समय गंवाए किसान को अपनी गाड़ी से हरदीबाजार के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। बाद में पुलिस भी मौके और अस्पताल पहुंची, जहां आवश्यक पूछताछ समाचार लिखे जाने तक जारी रही।
कार्रवाई के बाद भी हालात जस के तस
गौरतलब है कि सुमेर सिंह गोंड की घटना के बाद कलेक्टर के निर्देश पर पाली एसडीएम रोहित सिंह ने राजस्व अमले और धान खरीदी से जुड़े प्रबंधकों की आपात बैठक बुलाकर सभी लंबित और विवादित मामलों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद 24 घंटे के भीतर दूसरा मामला सामने आना यह दर्शाता है कि धान खरीदी व्यवस्था में सुधार कागजों तक ही सीमित है।
फिर खड़े हुए तीखे सवाल
हालांकि आत्मघाती कदम किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि रकबा निर्धारण में गड़बड़ी, रिकॉर्ड अपडेट में लापरवाही, और धान बिक्री प्रक्रिया की जटिलता
किसानों को मानसिक रूप से तोड़ रही है।
सवाल यह है कि क्या निलंबन और नोटिस से व्यवस्था सुधर जाएगी?
जब एक घटना के बाद भी दूसरी घटना हो रही है, तो जिम्मेदारी किसकी है?
क्या प्रशासन किसानों की समस्या तब सुनेगा, जब हालात इतने गंभीर हो जाएं?
अब दूसरे मामले के बाद प्रशासनिक स्तर पर फिर मंथन की बात कही जा रही है, लेकिन किसान यह पूछने को मजबूर हैं कि
क्या उन्हें समय रहते राहत मिलेगी, या फिर हर बार किसी की जान खतरे में पड़ने के बाद ही कार्रवाई होगी?
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