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बालोद– रोवर–रेंजर जंबूरी 2026 पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा

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बालोद छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


बालोद जिले के ग्राम दूधली में आयोजित राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी 2026 एक युवा नेतृत्व और साहसिक गतिविधियों के आयोजन से कहीं आगे निकल गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों और युवाओं को नेतृत्व, टीम वर्क और आत्मनिर्भरता सिखाने का दावा किया गया था, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के खुलासे ने इसे विवादित बना दिया है। इस आयोजन में लगभग पांच करोड़ रुपये का खर्च किया गया था, जिसमें आश्चर्यजनक रूप से दो करोड़ रुपये केवल अस्थायी टॉयलेट निर्माण पर खर्च किए गए।

सवाल उठता है कि क्या यह साधारण अस्थायी टॉयलेट था या अत्याधुनिक सुविधाओं के बहाने भ्रष्टाचार को छुपाने का माध्यम।
इस मामले को और गंभीरता इस बात से मिलती है कि आयोजन स्थल पर कार्य बिना विधिवत टेंडर के शुरू कर दिया गया। जिस एजेंसी को कार्य मिला, उसने लगभग एक माह पहले से ही स्थल पर काम शुरू कर दिया था। केवल औपचारिकता के लिए पांच जनवरी 2026 को टेंडर खोला गया।

पूर्व में इस पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सीधे आरोप लगाए कि यह पूरा आयोजन पहले से ही कुछ प्रभावशाली नेताओं के दबाव में और उनके करीबी ठेकेदारों के लाभ के लिए सेट किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 करोड़ रुपये की कुल राशि का प्रबंध सीधे जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में स्थानांतरित किया गया, जिसमें आयोजन स्थल और वास्तविक कार्य से जुड़े नियमों और वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन स्पष्ट था। अग्रवाल ने यह भी आरोप लगाया कि आयोजन में शामिल व्यवस्थाएं जैसे वीआईपी कुर्सी, डिनर टेबल, टेंट और टॉयलेट केवल दिखावा और विलासिता के लिए रखी गई थीं, न कि वास्तविक आवश्यकता के आधार पर।
प्रतिष्ठित मीडिया एवं पत्रिका से प्राप्त जानकारी के अनुसार वीआईपी कुर्सी की दर 1,100 रुपये प्रति सीट थी, डिनर टेबल 12,500 रुपये प्रति टेबल, टेंट 19,000 रुपये प्रति टेंट और वॉशबेसिन 1,600 रुपये प्रति नग खरीदे गए। इतने बड़े आयोजन में इतनी भारी राशि का अस्थायी टॉयलेट पर खर्च होना न केवल वित्तीय अनुशासन के उल्लंघन का संकेत है, बल्कि यह जनता के धन के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है। सांसद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में देरी और बिना औपचारिक अनुमति कार्य शुरू करना सीधे नियमों का उल्लंघन है और इसमें मिलीभगत की आशंका है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह के आयोजनों में पारदर्शिता केवल कागजों तक सीमित है और क्या वास्तविक जवाबदेही कभी जमीन पर दिखाई देती है।
इस पूरे मामले में यह भी सामने आया कि आयोजन स्थल पर अन्य व्यवस्थाओं जैसे टेंट, बिजली, भोजन और फोटोग्राफी की लागत का ब्योरा भी अस्पष्ट है। आयोजन की शुरुआत से पहले ही एजेंसी ने काम शुरू कर दिया था और स्थानीय अधिकारियों द्वारा इसे रोकने या निगरानी करने में चूक हुई। इससे यह सवाल उठता है कि क्या यह प्रशासनिक लापरवाही थी या कुछ बड़े दबाव और व्यक्तिगत हितों के कारण नियोजित कार्यों में गड़बड़ी की गई।
इस पूरे विवाद ने छत्तीसगढ़ में बड़े सरकारी आयोजनों की वित्तीय और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। रोवर–रेंजर जंबूरी न केवल युवा नेतृत्व और खेल गतिविधियों का मंच था, बल्कि यह जनता के धन के उचित उपयोग और सरकारी जवाबदेही की परीक्षा बन गया। सांसद बृजमोहन अग्रवाल के आरोप प्रत्यारोप ने यह स्पष्ट किया कि यदि ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो भविष्य में बड़े आयोजन जनता के धन और विश्वास दोनों को जोखिम में डाल सकते हैं।
स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की वित्तीय अनियमितताएं केवल बालोद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे राज्य में बड़े आयोजनों में गहरी पैठ बना चुकी हैं। सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार और जिला प्रशासन इस मुद्दे की गंभीर जांच करेंगे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे या यह मामला भी अस्थायी टॉयलेट की तरह धूल में दफन कर दिया जाएगा।
इस विवाद ने स्पष्ट कर दिया है कि बड़े आयोजनों में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन केवल नियमों में नहीं, बल्कि कार्यान्वयन के हर चरण में सुनिश्चित होना चाहिए। रोवर–रेंजर जंबूरी का यह मामला दर्शाता है कि कैसे लाखों रुपये के कार्यक्रम में साधारण व्यवस्थाओं के लिए ही करोड़ों का दुरुपयोग किया जा सकता है और जनता के प्रति जिम्मेदारी के बिना प्रशासनिक प्रक्रियाएं केवल औपचारिकताओं तक सीमित रह सकती हैं।

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