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संस्कृति के नाम पर तमाशा, कुर्सी और वर्दी हुई बेनकाब

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गरियाबंद  छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

ओपेरा कार्यक्रम में अश्लीलता का खुला खेल, SDM नोट उड़ाते दिखे, पुलिस की वर्दी भी हुई शर्मसार

गरियाबंद | ACGN :-छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से सामने आया एक वायरल वीडियो इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने प्रशासनिक जिम्मेदारी और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देवभोग थाना क्षेत्र के उरमाल गांव में आयोजित छह दिवसीय तथाकथित ओपेरा और ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम में मनोरंजन की आड़ में सारी सामाजिक और नैतिक सीमाएं लांघ दी गईं। कार्यक्रम में ओडिशा से बुलाई गई बार डांसरों द्वारा अर्धनग्न और फूहड़ नृत्य किया गया, जिसे वहां मौजूद लोगों ने मोबाइल कैमरों में कैद कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
सबसे चौंकाने वाला दृश्य यह रहा कि कार्यक्रम स्थल पर मौजूद मैनपुर के तत्कालीन एसडीएम तुलसीदास मरकाम मंच के पास बैठकर खुलेआम नोट उड़ाते और मोबाइल से वीडियो बनाते नजर आए। इतना ही नहीं, वीडियो में दो पुलिसकर्मी भी अपनी वर्दी की गरिमा भूलते हुए डांसर्स के साथ आपत्तिजनक हरकतें करते दिखाई दिए। यह दृश्य न सिर्फ प्रशासनिक मर्यादा पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कानून के रखवाले ही जब नियमों को ताक पर रख दें, तो आम जनता किससे उम्मीद करे।


वीडियो के सोशल मीडिया पर आते ही इलाके में हड़कंप मच गया। आम लोगों से लेकर सोशल मीडिया यूजर्स तक हर कोई यह सवाल पूछता नजर आया कि जब कार्यक्रम स्थल पर प्रशासन और पुलिस मौजूद थी, तो इस तरह की अश्लीलता कैसे होने दी गई। जानकारी सामने आई है कि कार्यक्रम में 200 से 400 रुपये तक की एंट्री फीस ली जा रही थी और एसडीएम के लिए विशेष रूप से सीट आरक्षित की गई थी, जिससे पूरे आयोजन की अनुमति और मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।


मामला तूल पकड़ने के बाद जिला कलेक्टर भगवान सिंह उईके ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। एसडीएम तुलसीदास मरकाम को पद से हटाकर कलेक्टरेट में अटैच किया गया और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। पूरे प्रकरण की जांच के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई है। वहीं देवभोग थाना के दो आरक्षक जय कुमार कंसारी और शुभम चौहान को लाइन अटैच कर दिया गया। आयोजन से जुड़े लोगों के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें बाद में मुचलके पर रिहा कर दिया गया।


हालांकि कार्रवाई के बाद भी जनता के सवाल खत्म नहीं हुए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जिस अधिकारी ने कार्यक्रम की अनुमति दी और खुद वहां मौजूद रहकर अशोभनीय आचरण किया, उस पर की गई कार्रवाई क्या पर्याप्त है। क्या केवल पद से हटाना और लाइन अटैच करना इस गंभीर मामले के लिए काफी है। वीडियो में पुलिसकर्मियों की हरकतों ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की साख पर भी गहरी चोट पहुंचाई है। अब देखना यह होगा कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है या वास्तव में दोषियों पर सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई होती है।

प्रदीप मिश्रा
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