वन भूमि से कब्जा हटाने पहुंची टीम, ग्रामीणों ने घेरा सवालों से; कार्रवाई पर उठे सवाल
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू
महुली बीट के कक्ष क्रमांक 555 में दीवार हटाने पहुंचा वन अमला, ग्रामीणों ने कहा– कार्रवाई करनी है तो सभी कथित अतिक्रमणों पर हो समान कार्रवाई
बिहारपुर ACGN:- सूरजपुर जिले के बिहारपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत महुली बीट के कक्ष क्रमांक 555 में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के विरोध और तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। रोहिना पहाड़ के नीचे वन भूमि पर बनाई गई ईंट की दीवार को हटाने की कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों और वनकर्मियों के बीच नोकझोंक हुई। विवाद के बीच ग्रामीणों ने विभाग की कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए क्षेत्र के सभी कथित अतिक्रमणों की जांच और समान कार्रवाई की मांग की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित वन भूमि पर ईंटों की दीवार बनाकर कब्जा किए जाने की शिकायत के बाद वन विभाग की टीम उसे हटाने पहुंची थी। लेकिन मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उनका सवाल था कि यदि वन भूमि पर अतिक्रमण हुआ है तो कार्रवाई केवल एक स्थान तक सीमित क्यों रहे? ग्रामीणों ने मांग की कि महुली बीट के पूरे क्षेत्र में जहां-जहां कब्जे किए गए हैं, उनकी पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

एक जगह कार्रवाई, बाकी कब्जों पर चुप्पी क्यों?
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई किसी एक व्यक्ति या स्थान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विभाग पूरे क्षेत्र का निरीक्षण कर सभी कथित कब्जों की जांच करे और नियमों के अनुसार समान कार्रवाई सुनिश्चित करे। ग्रामीणों का कहना है कि निष्पक्षता तभी दिखाई देगी, जब कार्रवाई का दायरा सभी अतिक्रमण वाले स्थानों तक पहुंचेगा।

छोटे झाड़ के जंगल की जमीन का भी उठा मामला
विवाद के दौरान छोटे झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज भूमि पर कब्जे का मुद्दा भी सामने आया। आरोप है कि संबंधित क्षेत्र में छोटे झाड़ के जंगलों को हटाकर जमीन पर कब्जा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में राजस्व अभिलेखों, भूमि की वास्तविक स्थिति और मौके पर हुए निर्माण का निष्पक्ष सत्यापन जरूरी है।

सीमांकन और जांच से ही सामने आएगी पूरी तस्वीर
अब सवाल यह है कि क्या वन विभाग कक्ष क्रमांक 555 और आसपास के क्षेत्र का सीमांकन कराकर सभी कथित अतिक्रमणों की पहचान करेगा? छोटे झाड़ के जंगल की भूमि पर कब्जे के आरोपों की जांच होगी या नहीं? और यदि नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाएगी?
वन भूमि और जंगलों का संरक्षण पर्यावरण तथा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए कार्रवाई पारदर्शी, निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के होनी चाहिए। फिलहाल ग्रामीणों के सवालों और वन विभाग की अगली कार्रवाई पर क्षेत्रवासियों की नजर बनी हुई है।
प्रदीप मिश्रा
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