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बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर स्कूलों में होगी विशेष पहल, शिक्षकों को तैयार कर रहा प्रशिक्षण

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009


यूनिसेफ और समग्र शिक्षा के संयुक्त सहयोग से रायपुर में तीन दिवसीय राज्यस्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण आयोजित। TISS के SIMHA ने दिया तकनीकी सहयोग। बस्तर संभाग के सात जिलों और धमतरी के चयनित शिक्षक अब अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को करेंगे प्रशिक्षित।


रायपुर ACGN:- बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव केवल किताबी शिक्षा से नहीं, बल्कि उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य से भी जुड़ी होती है। पढ़ाई, प्रतिस्पर्धा और करियर की बढ़ती चुनौतियों के बीच बच्चों को सुरक्षित, सहयोगपूर्ण और तनावमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 28 से 30 अक्टूबर 2026 तक होटल सयाजी, रायपुर में तीन दिवसीय राज्यस्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
यह प्रशिक्षण यूनिसेफ ने समग्र शिक्षा के सहयोग से आयोजित किया, जबकि टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की स्कूल इनिशिएटिव फॉर मेंटल हेल्थ एडवोकेसी (SIMHA) ने तकनीकी साझेदार के रूप में सहयोग प्रदान किया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों और व्याख्याताओं की समझ एवं क्षमता को मजबूत करना था, ताकि वे बच्चों की मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकें तथा उन्हें समय पर उचित सहयोग दे सकें। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बच्चों के सीखने, शिक्षा और समग्र विकास में मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
विशेष रूप से किशोरावस्था की शुरुआती अवधि बच्चों के जीवन का ऐसा चरण है, जिसमें वे कई शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलावों से गुजरते हैं। इस दौरान उन्हें अनेक अवसरों के साथ नई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में स्कूल और शिक्षक बच्चों के लिए सुरक्षित, भरोसेमंद और सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


तनाव के संकेत पहचानने से लेकर सहायता उपलब्ध कराने तक का प्रशिक्षण
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बच्चों की भावनाओं को समझने और पहचानने, तनाव के शुरुआती संकेतों को जानने तथा उससे निपटने के सरल तरीकों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही बच्चों की खूबियों और क्षमताओं को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित करने, कक्षा में सकारात्मक एवं सहयोगपूर्ण माहौल बनाने और जरूरत पड़ने पर बच्चों को उचित सहायता सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया यानी रेफरल के बारे में भी प्रशिक्षित किया गया।
प्रशिक्षण में केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित रहने के बजाय सहभागी और गतिविधि आधारित पद्धति अपनाई गई। समूह चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास और प्रतिभागियों के अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से विषयों को समझाया गया, ताकि शिक्षक वास्तविक परिस्थितियों में इन तरीकों का उपयोग कर सकें।


बस्तर के सात जिलों और धमतरी के शिक्षक हुए शामिल
इस राज्यस्तरीय प्रशिक्षण में बस्तर संभाग के सभी सात जिलों तथा धमतरी जिले से चयनित शिक्षकों एवं व्याख्याताओं ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। इसके साथ ही स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक कल्याण से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में भी सहयोग करेंगे।
इस पहल का उद्देश्य राज्य के अधिक से अधिक स्कूलों में ऐसा वातावरण विकसित करना है, जहां बच्चे स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और सहयोग प्राप्त करने वाला महसूस कर सकें। इससे शिक्षकों को बच्चों की जरूरतों को समय रहते समझने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
बच्चों पर पढ़ाई और करियर का दबाव कम करना जरूरी
समग्र शिक्षा के उप संचालक श्री कौशिक ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। आज हर बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहता है। इसके कारण बच्चों पर पढ़ाई और करियर को लेकर काफी दबाव रहता है। ऐसे में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होना बहुत जरूरी है, ताकि वे बिना किसी अनावश्यक दबाव के अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार अपने भविष्य एवं करियर का निर्माण कर सकें।


स्कूल में हर बच्चे को मिले सुरक्षा और सम्मान का एहसास
यूनिसेफ छत्तीसगढ़ फील्ड ऑफिस की प्रमुख सीमा कुमार ने कहा कि हर बच्चे को स्कूल में सुरक्षित और सम्मानित महसूस होना चाहिए। उसे यह एहसास होना चाहिए कि वह इस परिवेश का अभिन्न हिस्सा है। मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग (MHPSS) देखभाल की एक सतत प्रक्रिया है, जो स्कूल, परिवार और समुदाय को आपस में जोड़ती है।
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में बच्चों की मातृभाषा सुरक्षा, पहचान और अपनेपन की भावना विकसित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
पढ़ाई के साथ मानसिक और भावनात्मक कल्याण भी जरूरी
यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के शिक्षा विशेषज्ञ श्री रवि राज दयाल ने कहा कि बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार और उनके मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देने के प्रयास एक साथ चलने चाहिए। स्कूल केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग प्रदान करने वाले स्थान भी बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग के क्षेत्र में शिक्षकों की क्षमता मजबूत करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि प्रत्येक बच्चे को सीखने, अपनी क्षमता विकसित करने और जीवन में आगे बढ़ने का उचित अवसर मिल सके।
शिक्षा से जुड़े इस प्रशिक्षण के माध्यम से अब जिलों में मास्टर ट्रेनर्स अन्य शिक्षकों तक मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक सहयोग की जानकारी पहुंचाएंगे। इससे स्कूलों में बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को समझने और उन्हें सकारात्मक वातावरण देने की पहल को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की उम्मीद है।


प्रदीप मिश्रा
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