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पुरुंगा में फिर गूंजा विरोध! अडानी कोल ब्लॉक के खिलाफ 11 नवंबर को हुंकार

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रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी रायगढ़

एक साल बाद फिर सुलगने लगी पुरुंगा की आवाज! 11 नवंबर को सड़क पर उतरने की तैयारी, अडानी कोल ब्लॉक के खिलाफ ग्रामीणों की हुंकार
पुरुंगा स्कूल ग्राउंड में जुटे पुरुंगा, तेंदूमुड़ी और समरसिंघा के महिला-पुरुष ग्रामीण; जल-जंगल-जमीन बचाने एकजुटता का संकल्प। 11 नवंबर 2025 को भारी विरोध के बाद स्थगित हुई थी जनसुनवाई, अब दोबारा आयोजन की चर्चाओं के बीच बढ़ी हलचल।

धरमजयगढ़ ACGN:- धरमजयगढ़ के वनांचल में प्रस्तावित पुरुंगा कोयला परियोजना को लेकर विरोध की आवाज एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। पिछले वर्ष जनसुनवाई स्थगित होने के बाद अब दोबारा जनसुनवाई कराए जाने की चर्चाओं के बीच पुरुंगा, तेंदूमुड़ी और समरसिंघा क्षेत्र के ग्रामीण फिर एकजुट होने लगे हैं। पुरुंगा स्कूल ग्राउंड में आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीणों की मौजूदगी ने संकेत दिया कि परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर असहमति अभी समाप्त नहीं हुई है।
बैठक में ग्रामीणों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा गांवों के भविष्य से जुड़े सवालों पर एकजुट रहने का संकल्प दोहराया। ग्रामीणों के बीच आगामी 11 नवंबर को सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराने की तैयारी को लेकर भी चर्चा हुई। ऐसे में प्रस्तावित कोयला परियोजना का मुद्दा एक बार फिर क्षेत्र में चर्चा के केंद्र में आ गया है।


पिछले साल 11 नवंबर को भारी विरोध के बाद स्थगित हुई थी जनसुनवाई
गौरतलब है कि 11 नवंबर 2025 को पुरुंगा स्कूल ग्राउंड में प्रस्तावित परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित होनी थी। हालांकि, ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद जनसुनवाई स्थगित कर दी गई थी। अब एक बार फिर जनसुनवाई कराए जाने की सुगबुगाहट के बीच ग्रामीणों की सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों की हालिया बैठक को इसी पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में लोगों ने स्पष्ट किया कि परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और सामाजिक सवालों पर वे अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं।


एक तारीख, फिर वही सवाल – 11 नवंबर को क्या होगा?
ग्रामीणों के बीच इस बार भी 11 नवंबर को विरोध दर्ज कराने की तैयारी चर्चा में है। पिछले वर्ष इसी तारीख को जनसुनवाई स्थगित हुई थी। अब एक साल बाद उसी तारीख के आसपास ग्रामीणों की सक्रियता बढ़ने से क्षेत्र में आगे की गतिविधियों को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।
हालांकि, प्रस्तावित विरोध के स्वरूप, स्थान और भागीदारी को लेकर अंतिम स्थिति ग्रामीणों की आगे की रणनीति पर निर्भर करेगी। वहीं, नई जनसुनवाई की तारीख को लेकर आधिकारिक आदेश या सूचना सामने आने के बाद ही प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


               तीन पंचायतों की एकजुटता पर जोर
पुरुंगा, तेंदूमुड़ी और समरसिंघा क्षेत्र के ग्रामीणों का एक मंच पर जुटना आंदोलन की दिशा में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। बैठक में गांवों के भविष्य, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय आजीविका से जुड़े मुद्दों पर सामूहिक रूप से आवाज उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। ग्रामीणों के बीच यह विचार सामने आया कि जल-जंगल-जमीन का सवाल केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध पूरे क्षेत्र और आने वाली पीढ़ियों से है। इसी वजह से ग्रामीण आपसी एकता बनाए रखते हुए अपनी मांगों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखने की तैयारी कर रहे हैं।


करीब 869 हेक्टेयर का प्रस्तावित कोल ब्लॉक, वन भूमि को लेकर चिंता
उपलब्ध परियोजना संबंधी दस्तावेजों के अनुसार, प्रस्तावित पुरुंगा भूमिगत कोयला परियोजना का क्षेत्रफल लगभग 869.025 हेक्टेयर बताया गया है। इसमें करीब 621.331 हेक्टेयर वन भूमि शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
वन भूमि से जुड़ा यह आंकड़ा परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों को महत्वपूर्ण बनाता है। स्थानीय स्तर पर जंगल, वन्यजीव, जलस्रोत, पर्यावरण, वनाधिकार और ग्रामीणों की आजीविका पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई जा रही है।
हालांकि, परियोजना के वास्तविक प्रभावों का आकलन संबंधित पर्यावरणीय अध्ययन, आधिकारिक दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकरणों की प्रक्रिया के आधार पर किया जाना आवश्यक है। ग्रामीणों की मांग है कि उनके सवालों और चिंताओं को किसी भी आगामी प्रक्रिया में गंभीरता से सुना जाए।
         दोबारा जनसुनवाई से पहले ही बढ़ी हलचल
पुरुंगा स्कूल ग्राउंड में ग्रामीणों की बैठक से स्पष्ट है कि प्रस्तावित कोयला परियोजना को लेकर स्थानीय विरोध का मुद्दा फिर सक्रिय हो रहा है। पिछले वर्ष जनसुनवाई स्थगित होने और अब दोबारा आयोजन की चर्चाओं के बीच ग्रामीणों की लामबंदी ने प्रशासन के सामने भी संवाद और स्पष्टता की जरूरत को रेखांकित किया है।
फिलहाल नई जनसुनवाई की तारीख की आधिकारिक पुष्टि सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। वहीं, ग्रामीणों की आगामी रणनीति और 11 नवंबर को प्रस्तावित विरोध पर क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं।
अब सवाल यह है कि क्या इस बार ग्रामीणों की आवाज प्रशासन तक नए सिरे से पहुंचेगी, और क्या परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय व सामाजिक सवालों पर उन्हें स्पष्ट जवाब मिल पाएंगे? आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर होने वाली गतिविधियां पुरुंगा क्षेत्र की आगे की तस्वीर तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।



प्रदीप मिश्रा
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