49 दिन का साइबर जागृति महाअभियान खत्म, 18 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश
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बिलासपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
विद्यार्थियों से लेकर ग्रामीणों और वरिष्ठ नागरिकों तक चला जागरूकता अभियान, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी से बचाव पर रहा खास जोर
बिलासपुर ACGN:- साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच बिलासपुर पुलिस का 49 दिवसीय साइबर जागृति महाअभियान 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित समापन समारोह के साथ पूरा हुआ। पुलिस के मुताबिक 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक चले इस अभियान के दौरान अलग-अलग माध्यमों और गतिविधियों के जरिए 18 लाख से अधिक नागरिकों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया।

बिलासपुर पुलिस ने अभियान को सात सप्ताह में अलग-अलग वर्गों के लिए केंद्रित किया। पहले सप्ताह में विद्यार्थियों और युवाओं, दूसरे सप्ताह में बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थाओं, तीसरे सप्ताह में वरिष्ठ नागरिकों, चौथे सप्ताह में महिलाओं एवं छात्राओं, पांचवें सप्ताह में असंगठित क्षेत्र के युवाओं एवं श्रमिकों, छठे सप्ताह में शासकीय संस्थाओं और सातवें सप्ताह में ग्रामीण तथा अर्धसैनिक क्षेत्र से जुड़े नागरिकों को साइबर अपराध से बचाव की जानकारी दी गई।
पुलिस के अनुसार अभियान को केवल बैठकों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि साइबर संवाद, साइबर जुम्बा, साइबर जागृति रक्षा सूत्र, नुक्कड़ नाटक, साइबर प्रश्नोत्तरी, नाटक एवं नृत्य, खेल उत्सव, स्केटिंग, ताइक्वांडो और कराटे जैसी गतिविधियों के माध्यम से भी जागरूकता संदेश लोगों तक पहुंचाया गया। एफएम रेडियो के जरिए नियमित साइबर सुरक्षा संदेश प्रसारित किए गए और विशेष साइबर जागृति गीत के माध्यम से भी लोगों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक किया गया।

बिलासपुर पुलिस ने पुलिस ग्राउंड में साइबर फ्रॉड मटका फोड़ जैसे कार्यक्रम के साथ करीब एक हजार आकाशदीप प्रज्वलित कर साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया। वहीं ग्रामीण इलाकों में साइबर ग्राम चौपाल आयोजित कर ऑनलाइन ठगी, बैंकिंग फ्रॉड, ओटीपी फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों से बचने के तरीके बताए गए। गणेश पंडालों में भी श्रद्धालुओं और नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।

अभियान के दौरान साइबर संवाद कार्यक्रमों में पुलिस अधिकारियों के साथ गणमान्य नागरिकों, व्यापारिक संगठनों, समाजसेवी संस्थाओं, एनजीओ, चेतना मित्रों, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और शिक्षकों, खिलाड़ियों तथा मीडिया प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इन कार्यक्रमों में साइबर अपराध के अलग-अलग तरीकों, बचाव के उपायों और साइबर पीड़ितों के अनुभवों पर चर्चा की गई तथा नागरिकों की शंकाओं का समाधान किया गया।

डिजिटल अरेस्ट के मामलों को लेकर भी बिलासपुर पुलिस ने विशेष रूप से लोगों को सावधान किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के हवाले से पुलिस ने बताया कि एक परिवार को साइबर ठगों ने करीब 17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर भयभीत और नियंत्रित रखा, जिसके बाद परिवार की लाखों रुपये की जमा पूंजी ठगी का शिकार हुई। पुलिस ने इस घटना के माध्यम से लोगों को समझाया कि कोई भी पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही किसी खाते में रकम जमा कराने के लिए कहती है।


अभियान के दौरान ऑनलाइन ठगी, यूपीआई फ्रॉड, क्यूआर कोड फ्रॉड, फिशिंग, विशिंग, स्मिशिंग, ओटीपी फ्रॉड, केवाईसी फ्रॉड, बैंक अकाउंट फ्रॉड, क्रेडिट और डेबिट कार्ड फ्रॉड, एटीएम फ्रॉड, सिम स्वैप, पहचान की चोरी, अकाउंट हैकिंग, सोशल मीडिया और ई-मेल हैकिंग, पासवर्ड चोरी, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, ऑनलाइन प्रतिरूपण, साइबर स्टॉकिंग, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, सेक्सटॉर्शन, मॉर्फ्ड फोटो-वीडियो और डीपफेक जैसे अपराधों के बारे में भी नागरिकों को जानकारी दी गई।



अभियान के दौरान एक नौ वर्षीय छात्र स्वास्तिक झा की साइबर जागरूकता भी पुलिस के मुताबिक चर्चा में रही। डेली रूटीन पेट्रोलिंग के दौरान डीपीएस स्कूल के छात्र स्वास्तिक ने साइबर अपराधों के अलग-अलग प्रकार और उनसे बचने के उपायों की जानकारी साझा की। उसकी जागरूकता से प्रभावित होकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने उसे प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया।



समापन समारोह में अभियान के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों तथा सहयोगी संस्थाओं और व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा पर आधारित नृत्य, नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। पुलिस के अनुसार अभियान में राज्य के विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने भी अलग-अलग अवसरों पर सहभागिता कर साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।

बिलासपुर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें तथा अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप डाउनलोड न करें। वीडियो कॉल पर पुलिस, सीबीआई, ईडी या कस्टम अधिकारी बनकर धमकाने वाले लोगों से सावधान रहने और क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले उसकी सत्यता जांचने की अपील भी की गई है। पुलिस ने कहा है कि साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करें और नजदीकी पुलिस थाने या साइबर सेल को सूचना दें।




समापन कार्यक्रम में उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह, जिलाधीश संजय अग्रवाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर पंकज पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मधुलिका सिंह, सीएसपी सिविल लाइन परमेश्वर तिलकवार सहित पुलिस अधिकारी-कर्मचारी, मीडिया प्रतिनिधि, प्रतिभागी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

बिलासपुर पुलिस ने कहा है कि 49 दिवसीय अभियान समाप्त होने के बावजूद साइबर जागरूकता का अभियान जारी रहेगा। पुलिस का कहना है कि सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के लिए सतर्कता और जागरूकता सबसे जरूरी है और प्रत्येक नागरिक को साइबर अपराधों से बचाने के लिए जागरूकता गतिविधियां आगे भी जारी रखी जाएंगी।
प्रदीप मिश्रा
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