9 साल की बंदिश टूटी, अब 2024 तक शहर में रहने वालों को मिलेगा आवास का मौका, प्रधानमंत्री आवास योजना की कट-ऑफ डेट बढ़ी
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
31 अगस्त 2015 की जगह 31 अगस्त 2024 हुई कट-ऑफ डेट, एएचपी आवासों के लिए नए हितग्राहियों की तलाश 15 दिन में पूरी करने के निर्देश
रायपुर ACGN:- शहरी इलाकों में लंबे समय से पक्के मकान की उम्मीद लगाए बैठे गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के तहत हितग्राहियों के निवास की वैधता तय करने वाली कट-ऑफ तिथि को 31 अगस्त 2015 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2024 कर दिया गया है। यानी अब वे परिवार भी योजना के दायरे में आ सकेंगे, जो पिछले नौ वर्षों से शहरों में निवास कर रहे हैं, लेकिन पुरानी कट-ऑफ तारीख के कारण आवास योजना के लाभ से बाहर रह गए थे।
राज्य शासन के इस निर्णय के बाद नगरीय निकायों में पात्र परिवारों की पहचान, दस्तावेजों का सत्यापन और आवास आवंटन की प्रक्रिया को गति देने की तैयारी है। सरकार ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को संशोधित प्रावधान के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
पुरानी तारीख बनी थी बड़ी बाधा
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद शहरी परिवारों को पक्का और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन पुरानी कट-ऑफ तारीख के कारण ऐसे कई परिवार योजना से बाहर हो रहे थे, जो वर्षों से संबंधित शहर में रह रहे थे। अब 2015 की जगह 2024 को आधार बनाने से पात्रता का दायरा बढ़ गया है।
सरकार का मानना है कि शहरों की आबादी और आवासीय जरूरतों में पिछले वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। किराये के मकानों, अस्थायी बस्तियों या कमजोर आवासीय परिस्थितियों में रहने वाले पात्र परिवारों को अब योजना से जोड़ने का रास्ता आसान होगा।
एएचपी आवासों में खाली जगह भरने की तैयारी
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप यानी एएचपी घटक के तहत बने आवासों में नए पात्र हितग्राहियों के चयन और आवंटन को भी इस फैसले से गति मिलने की उम्मीद है।
राज्य शासन ने नगरीय निकायों को संशोधित कट-ऑफ तिथि के आधार पर आवास से वंचित पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें एएचपी आवासों का लाभ दिलाने की प्रक्रिया 15 दिनों में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है।
36,969 आवास स्वीकृत, 29,267 पूरे
छत्तीसगढ़ में एएचपी घटक के तहत अब तक 36 हजार 969 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 29 हजार 267 आवास पूरे हो चुके हैं, जबकि 7 हजार 702 आवास निर्माण के अलग-अलग चरणों में हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार स्वीकृत आवासों में करीब 79 प्रतिशत का निर्माण पूरा हो चुका है।
निर्मित और उपलब्ध आवासों में से अब तक 30 हजार 438 आवासों का आवंटन किया जा चुका है। इनमें 21 हजार 923 परिवार अपने पक्के मकानों में रहना भी शुरू कर चुके हैं।
सरकार का दावा – पक्का घर सिर्फ छत नहीं
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य गरीब परिवारों को केवल मकान देना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी आवास उपलब्ध कराना है। उनके अनुसार कट-ऑफ तारीख बढ़ने से अधिक पात्र परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ सकेंगे और ‘सबके लिए आवास’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने भी कहा है कि नई कट-ऑफ तारीख से एएचपी परियोजनाओं में हितग्राही चयन और योजनाबद्ध बसाहट को गति मिलेगी। उनका लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास से जोड़ना बताया गया है।
केंद्र और राज्य से मिल रहा अनुदान
एएचपी घटक के अंतर्गत स्लम क्षेत्रों में रहने वाले शहरी गरीब आवासहीन परिवारों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रति आवास 1.50 लाख रुपये और राज्य सरकार की ओर से 2.50 लाख रुपये का अनुदान दिए जाने की जानकारी दी गई है। ऐसे मामलों में हितग्राही अंशदान 75 हजार रुपये प्रति आवास रखा गया है, जिसे आसान किश्तों में जमा करने की सुविधा दी गई है।
वहीं किराये के मकानों में रहने वाले कमजोर आय वर्ग के पात्र परिवारों को स्वयं का पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए केंद्र से प्रति आवास 1.50 लाख रुपये का अनुदान तथा राज्य सरकार की ओर से आवास निर्माण के लिए निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है। इसमें हितग्राही अंशदान 3.25 लाख रुपये प्रति आवास है, जिसे आसान किश्तों में जमा करने की सुविधा दी जा रही है।
हितग्राही अंशदान जमा करने में सुविधा देने के लिए नगरीय निकायों के माध्यम से लोन मेले भी आयोजित किए जा रहे हैं।
अब असली चुनौती पात्र परिवारों तक लाभ पहुंचाने की
कट-ऑफ तारीख बढ़ाने का फैसला निश्चित रूप से उन परिवारों के लिए राहत की खबर है, जो पुरानी पात्रता सीमा के कारण योजना से बाहर थे। लेकिन इस फैसले की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब नए पात्र परिवारों की पहचान निष्पक्ष तरीके से हो, दस्तावेज सत्यापन में अनावश्यक परेशानी न आए और पात्र लोगों को वास्तव में आवास का आवंटन मिले।
15 दिनों की समय-सीमा में निकायों को कार्रवाई पूरी करने के निर्देश के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जमीनी स्तर पर यह प्रक्रिया कितनी तेजी से और कितनी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ती है। पक्के मकान का सपना देखने वाले गरीब परिवारों के लिए सरकारी घोषणा तभी वास्तविक राहत बनेगी, जब योजना का लाभ कागज से निकलकर उनके घर की चौखट तक पहुंचे।
प्रदीप मिश्रा
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