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मोबाइल की एक गलती पड़ सकती है भारी! 800 युवाओं को साइबर ठगी से बचने का पाठ

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में साइबर जागरूकता कार्यक्रम, मंत्री रामविचार नेताम की मौजूदगी में युवाओं को डिजिटल सुरक्षा के बताए तरीके

रायपुर ACGN:- प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “साइबर जागृति अभियान” के तहत इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषक नगर रायपुर में विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों, प्रोफेसरों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों को साइबर अपराध के बदलते तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी।


छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा प्रदेशवासियों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक प्रदेशव्यापी “साइबर जागृति अभियान” चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत 3 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के साथ कलिंगा विश्वविद्यालय और मैट्स विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, प्रोफेसरों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों सहित करीब 800 लोगों ने भाग लिया।


कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर गिरीश चंदेल, पुलिस उपायुक्त मध्य जोन तारकेश्वर पटेल, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त क्राइम एवं साइबर गौरव मंडल, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता सहित पुलिस और विश्वविद्यालय के अधिकारी मौजूद रहे।


फर्जी कॉल से डिजिटल अरेस्ट तक, साइबर अपराधियों के जाल से किया सावधान
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक, ओटीपी के नाम पर ठगी, बैंक एवं यूपीआई फ्रॉड, फर्जी कस्टमर केयर, सोशल मीडिया के जरिए धोखाधड़ी, फर्जी निवेश योजनाएं, नौकरी और लोन के नाम पर ठगी, डिजिटल अरेस्ट तथा सेक्सटॉर्शन जैसे मामलों से लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।


विशेष रूप से युवाओं को सोशल मीडिया और इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहने की सलाह दी गई। पुलिस ने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम या डेबिट कार्ड की जानकारी, बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी और पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए।


इसके साथ ही अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध एप्लीकेशन डाउनलोड करने और सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से भी बचने की अपील की गई।


      डर, लालच या दबाव में न करें ऑनलाइन लेन-देन
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को समझाया गया कि साइबर अपराध से बचने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता और सतर्कता है। किसी अनजान कॉल, मैसेज, ई-मेल या सोशल मीडिया संदेश पर तत्काल भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी व्यक्ति द्वारा डराने, दबाव बनाने या लालच देने पर भी जल्दबाजी में ऑनलाइन लेन-देन नहीं करना चाहिए।


पुलिस अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाए तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। ऑनलाइन ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने और संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को सूचना देने की सलाह दी गई। समय पर शिकायत करने से ठगी गई रकम को रोकने की संभावना बढ़ सकती है।


    अब विद्यार्थी बनेंगे साइबर जागरूकता के संदेशवाहक
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं से स्वयं साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने के साथ अपने परिवार, दोस्तों और आसपास के लोगों को भी जागरूक करने की अपील की गई।
पुलिस ने कहा कि आज मोबाइल फोन और इंटरनेट जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उनका सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग भी है।


कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि “सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और साइबर अपराध के विरुद्ध जागरूकता फैलाएं।” साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पुलिस और आम नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।


छत्तीसगढ़ पुलिस का “साइबर जागृति अभियान” प्रदेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य माध्यमों से लोगों को जागरूक कर रहा है। अभियान का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना और साइबर अपराध के प्रति प्रदेशवासियों को अधिक सजग बनाना है।

प्रदीप मिश्रा
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