आईजीकेवी की कीटशास्त्र परीक्षा का पेपर लीक: प्रोफेसर समेत 6 गिरफ्तार, 36 घंटे में पुलिस ने किया खुलासा
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
मास्टरमाइंड प्रोफेसर ने लिफाफे में छेद कर मोबाइल से बनाया प्रश्नपत्र का वीडियो, छात्रों को 11 हजार रुपये में बेचा; दो आरोपी अब भी फरार
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) की बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की कीटशास्त्र परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में पुलिस ने 36 घंटे के भीतर बड़ा खुलासा किया है। मामले में भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग के प्रोफेसर को मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताते हुए कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रोफेसर ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र वाले लिफाफे में सुई और नुकीले उपकरण से छोटा छेद कर मोबाइल कैमरे के माध्यम से प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग की और बाद में उसे अपने कॉलेज के छात्रों को 11 हजार रुपये में बेच दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा विद्यार्थियों का भविष्य सर्वोपरि, पेपर लीक मामले में जीरो टॉलरेंस; पूरी साजिश की होगी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि परीक्षाओं की शुचिता और विद्यार्थियों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। वहीं तेलीबांधा थाने में अज्ञात आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस और साइबर सेल को जांच में लगाया गया था।
पुलिस के मुताबिक, 20 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आईजीकेवी से संबद्ध कृषि महाविद्यालयों में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष द्वितीय सेमेस्टर के एजीसीएच-221 कीटशास्त्र विषय की परीक्षा आयोजित होनी थी। परीक्षा शुरू होने से पहले ही सुबह करीब 8:41 बजे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, कवर्धा के ई-मेल पर प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिली। इसके कुछ ही समय बाद संबंधित अधिकारियों को भी ई-मेल प्राप्त हुआ। विद्यार्थियों और छात्र प्रतिनिधियों ने व्हाट्सऐप के माध्यम से प्रश्नपत्र के कुछ प्रश्नों के कंटेंट वायरल होने की जानकारी विश्वविद्यालय को दी।
प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की पुष्टि के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा निरस्त कर दी। पुलिस ने प्रार्थी डॉ. एन.आर. रंगारे, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी की रिपोर्ट पर थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 360/26 दर्ज किया। आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2008 की धारा 4, 5 एवं 10 तथा धारा 316 बीएनएस के तहत कार्रवाई की गई।

36 घंटे की जांच में खुलती गई पेपर लीक की पूरी कड़ी
पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन तथा वरिष्ठ अधिकारियों की मॉनिटरिंग में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की। 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम को अलग-अलग स्तर पर लगाया गया। कबीरधाम, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और आसपास के जिलों में पुलिस टीमें भेजी गईं।
साइबर टीम ने सोशल मीडिया पर वायरल प्रश्नपत्र, स्क्रीनशॉट, फोटो, मैसेज और पोस्ट का तकनीकी विश्लेषण किया। प्रश्नपत्र सबसे पहले किस मोबाइल नंबर, अकाउंट या डिजिटल माध्यम से प्रसारित हुआ, इसकी टाइमलाइन तैयार की गई। संदिग्ध मोबाइल नंबरों, सोशल मीडिया अकाउंट, ग्रुप और डिजिटल संपर्कों की जांच के साथ संबंधित व्यक्तियों की गतिविधियों और लोकेशन का भी परीक्षण किया गया।
इसी दौरान पुलिस को दुर्ग निवासी अनुज मिंज के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। टीम ने दुर्ग पहुंचकर उसे पकड़ा और पूछताछ शुरू की। पूछताछ तथा तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ते हुए पुलिस उस कड़ी तक पहुंची, जहां से प्रश्नपत्र लीक होने का कथित स्रोत सामने आया।

प्रोफेसर पर मास्टरमाइंड होने का आरोप
पुलिस के अनुसार, मामले का मुख्य आरोपी योगेश सोनकेसरिया भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में वर्ष 2019 से प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। पिछले करीब एक वर्ष से वह अपने कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने तथा आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त कर उन्हें कॉलेज तक ले जाने का काम कर रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया कि 17 अगस्त को योगेश सोनकेसरिया उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के लिए जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय, रायपुर पहुंचा था। उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के बाद उसने आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त किए। प्रश्नपत्रों को कॉलेज ले जाने के बाद उसने सभी लिफाफे कॉलेज में रख दिए, लेकिन 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित तौर पर अपने घर ले गया।
पुलिस का आरोप है कि घर पहुंचने के बाद उसने प्रश्नपत्र वाले लिफाफे के साथ छेड़छाड़ की। सुई और नुकीले उपकरण की सहायता से लिफाफे में छोटा छेद कर मोबाइल कैमरा अंदर डालकर प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग बनाई गई। इसके बाद प्रश्नपत्र की सामग्री की नकल तैयार कर उसे अपने कॉलेज के छात्र अजय नायक और दो अन्य छात्रों को कुल 11 हजार रुपये में बेचने का आरोप है।
इसके बाद कथित तौर पर अजय नायक ने प्रश्नपत्र त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू तक पहुंचाया। इसी कड़ी के बाद प्रश्नपत्र सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित होने की बात सामने आई।

11 हजार रुपये, मोबाइल और उपकरण जब्त
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से मामले से संबंधित 11 हजार रुपये नगद, छह मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सूजा, कॉपी और फेविकोल जब्त किए हैं। पुलिस इन सामग्रियों को जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य मान रही है।

इस मामले में योगेश सोनकेसरिया, अजय नायक, त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, प्रकरण में संलिप्त दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रश्नपत्र लीक करने और उसे आगे प्रसारित करने की पूरी श्रृंखला में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ पर जीरो टॉलरेंस
प्रश्नपत्र लीक होने की घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था की गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से 36 घंटे में छह आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन अब जांच का अगला महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि प्रश्नपत्र प्राप्त करने और उसे सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में सुरक्षा चूक किस स्तर पर हुई।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। प्रश्नपत्र कहां से बाहर आया, किसने उसे प्रसारित किया और इस पूरी घटना में किन लोगों की भूमिका रही, जांच में प्रत्येक कड़ी सामने लाई जाएगी। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसके सुरक्षित रख-रखाव और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी व्यवस्था की समीक्षा कर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
निरस्त की गई कीटशास्त्र की परीक्षा सितंबर के प्रथम सप्ताह में पुनः आयोजित की जाएगी। अब विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस जांच के साथ विद्यार्थियों की नजर इस बात पर भी है कि परीक्षा व्यवस्था में हुई चूक के लिए जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
प्रदीप मिश्रा
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